*" सबको मानव समझो और समस्या खत्म करो "*
?समस्या क्या है वो तो पता ही होता है पर समाधान क्या ? वही ढुंढना होता है | समाधान मीले तो लोग इकट्ठे न होते पर ५०० को केहने पर ५ को ही समझ आता तो उतने ही सही ५ बूंद पानी तो इकठ्ठा हुआ | फिर ५०० को कहे तो ५ को समझ आया तो १० बूंद हुआ बस ऐसे कर ग्लास फिर बाल्टी फिर नदी और फिर समुद्र भर साथ मीलता है | ये समस्या इसलिए है क्योंकि सब मील रहा है रीति-रिवाज, धर्म, जाता पात, समुह आदि को एक मानव बनने में देर तो लगती ही है | अभी तो लोग काला - गोरा, ऊंचा- नीचा, जात-पात, अमीर-गरीब आदि में लगे हैं पर जब मानव ही है समझ जाएंगे तो समस्या भी खत्म हो जाएगी | जीतनी जल्दी मानव मानने लगेंगे उतनी जल्दी समस्या समाप्त हो जाएगी | रीति-रिवाज, धर्म आदि व्यक्तिगत है पर मानव के जीवन में समस्या होने पर हल ढूंढने के लिए वो कुछ भी करना चाहता है तो कुछ लोग ऐसे लोगों को फसा कर अपना फायदा निकाल लेते हैं | इसलिए समस्या है | पर समझ से सब कीया जाए तो कोई न फसा पाए और हल भी मील जाए |...ॐD