कोई मुझसे पूछता है तेरी क्या औकात है,
में बोला मेरी औकात जान ने की तेरी क्या हेसियत है,
तेरे पास सब कुछ होगा लेकिन मेरे जैसा जिगर नही,
डंके की चोट पे में सच बोलता मुजे कोई फ़िकर नही
लाख सवाल कर ले कोई मेरी काबिलियत पे,
जवाब में ज़ुबान से नही, देता में हरकत से,
हवा से ज़मीन पे आजा, तुजे ये मेरी नासियत है,
तूफान से नही डरता में, में खुद एक तूफान हु,
हमेसा के लिए तेरी बोलती बंद करा दु में वो ज़ुबान हु,
खुद की रोटी खुद कमा के खाने वाला मर्द हु,
यहा में लिखू वहां तुजे महसूस हो वो दर्द हु,
जिस्म में तेरे चाहे कितनी भी हो ताकात,
मेरी कलम से कम ही रहेगी तेरी औकात।
कोई मुझसे पूछता है क्या है तेरी औकात,
लाले, मेरी औकात जान ने की तेरी क्या हेसियत है।