#moralstories
"मैनें देखा था उसे।"
. . . ऽ ऽ ऽ . . . ऽ ऽ . . . ऽ ऽ . . . फिर वही सीटी की आवाज!
मैनें खिड़की खोल दी। आज उसने 'ब्लैक-वाईट फुल स्लीवस जर्सी' और उससे मिलती 'कैप' पहनी हुयी थी। हमेशा की तरह मस्त और लापरवाह सा, अपने दोनों हाथ जेब में डाले वह होठों से वही जानी पहचानी सीटी बजाता हुआ जा रहा था। मैं उसे दूर तक जाते हुये देखता रहा... देखता रहा। उसका मस्त अंदाज और सीटी की ये धुन जाने क्यों मेरे आत्मविश्वास को कई गुणा बढ़ा देती है। मैं जब भी किसी निराशा या परेशानी से दो चार होता हूँ तो अनायास ही यह धुन मेरे होठों पर आ जाती है।
. . ऽ ऽ ऽ . . . !
लोग उसे निकम्मा नाकारा और आवारा भी कह देते हैं। लेकिन मैं नही, क्योंकि मैनें देखा था उसे, एक लड़की की अस्मिता के लिये दो लड़कों से अकेले संघर्ष करते। . . . . शायद इसी सीटी की जिंदादिल धुन के आत्मविश्वास पर।
विरेंदर 'वीर' मेहता