... जिंदगी ...
चलो हंसने की कोई, हम वजह ढूंढते है,
जिधर हो न कोई गम, वो जगह ढूंढते है।
बहुत उड लिए ऊंचे आसमान में यारों,
चलो जमीन पे ही कहीं, हम वो सतह ढूंढते हैं ।
छूटा संग कितनों का, जिंदगी की जंग में,
चलो उनके दिलों की, हम गिरह ढूंढते हैं ।
बहुत समय गुज़रा भटकते हुए अंधेरों में,
चलो अंधेरी रात की, हम सुबह ढूंढते हैं ।