"शिक्षा है अनमोल रतन"
ये उन दिनों की बात है, जब B.sc का रिजल्ट आ चुका था।मेरे कुछ मित्र M.sc(chemistry)में दाखिले के लिए फार्म भर रहे थे।मैंने भी सोचा मैं भी फार्म भर देता हूँ, आगे चलकर किसी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में chemist की नौकरी मिल जाएगी।उन दिनों हमारी माली हालत अच्छी नहीं थी, घर में बहन बड़ी हो रही थी, एक छोटा भाई भी पढ़ाई कर रहा था।पिताजी दिल्ली में रहकर दूध डेरी का काम कर रहे थे।हम लोग गाँव में माँ के साथ रहते थे।
मैंने माँ को एड्मिसन वाली बात बताई, लेकिन माँ ने कहा बेटे थोड़े दिन रुक जा,तुम्हारे पापा का काम भी ठीक से नहीं चल रहा है, लेकिन घबराओ नहीं मैं कुछ जरूर करूंगी।हालांकि मेरी माँ ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी, यहां तक कि उनको अपनी दस्तखत बनाने नहीं आती थी, लेकिन उनसे बात करके कोई कभी नहीं जान पाया कि यह महिला पढ़ी लिखी नहीं है।कुछ दिनों के बाद उनका फोन आया, बेटे तू आकर पैसा ले जा।मैं आया और पैसे ले जाकर अपना एड्मिसन करवा लिया।मुझे बाद में पता चला कि मेरे घर पर पशुओं के नाम पर मात्र एक भैंस बची थी, उसको बेचकर माँ ने मुझे पैसे दिए थे।
ये बात जानकर मैं बहुत रोया, और आकर माँ से पूछा-माँ आपने ऐसा क्यूँ किया, उन्होंने मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा-लल्ला ये पैसे मैंने सही जगह लगाए हैं, जो शिक्षा तुम्हे मिलेगी उससे आगे चलकर तुम ना जाने कौन कौन सी उपलब्धियां हासिल करोगे, बेटे मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा धन शिक्षा ही है।
-कवि राकेश सागर
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