॥गिरगिट ॥
#माँरल स्टोरीज
नित्या एक समाज सुधारक थी । उसने अपना एक एनजीओ भी खोल रखा था । दहेज के खिलाफ होने वाले किसी भी कार्यक्रम में नित्या बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी औंर उनके खिलाफ एक्शन भी लेती थी।
नित्या बहुत खुश थी क्योंकि एक महीने के बाद उसकी शादी थी । नित्या भी खुशी मन से अपनी शादी की तैयारियों में जुटी हुई थी । हर चीज को खूब देख समझकर अच्छे औंर महंगे ब्रांड का सामान ले रही थी । उसे 60,000 का लहंगा पसंद आया तो माँ ने कहा –“ यह तो बहुत महंगा है थोड़ा हल्का वाला ले लो कौन तू रोज पहनेंगी ।“ नित्या तुनकते हुए –“आप भी न माँ , शादी कौन रोज- रोज होती है ? शादी तो एक ही बार होनी है ।मैं हर सामान ब्रान्डेड ही लूँगी । जिससे कि मैं ससुराल में अपना रौब दिखा सकूं और हाँ माँ ! लहँगा तो मैं यहीं लूँगी ।“ माँ का चेहरा उतर गया ।वह फीकी मुस्कान से बोली –“ हां,मेरी लाडों मैं सब कुछ तेरे मन का ही दिलाऊगी ।“ नित्या की मां ने बक्से से कुछ कागज निकाल कर अपने पति को देते हुए –“ देखो जी मकान गिरवी रख कर पैसे का बंदोबस्त कर लीजिये आखिर अपनी इकलौती बेटी है । शादी कोई रोज-रोज तो होनी नहीं इसलिए बेटी की शादी में कोई भी कसर नहीं रहनी चाहिए ।“ पापा हाथ में कागज लेकर धीमी गति से बाहर निकल गए। नित्या शान से मुस्कुराते हुए अपना सामान सहेजने औंर खुद ही पहन कर आइने में अपनी छँवि निहारने लगी।