# Moral Stories : मिट्टी के घर
रोजी -रोटी की तलाश में परमू और कमला शहर की एक चाल में आ बसे थे।परमू रोज दिहाडी मजदूरी करता और कमला दूसरों के घरों में घरेलू काम करती थी।कमला स्वभाव की नेक और ईमानदार थी। उसकी मालकिन उसे बडा स्नेह रखती थी,और हमेशा उसके बारे में बातें करती थी।कमला एक दिन पूछ बैठी
"क्या करती रहती हो बीबी जी दिन भर मोबाइल पर।"
"कहानियाँ लिखते हैं कमला, कामगारों, गरीबों और तुम जैसी काम वाली बाईयों की समस्याओं पर "
"हाँ बीबी जी, बडी मुश्किल है हमारी जिंदगी में, कल बहुत झगड़ा हुआ हम दोनों में दारू के लिए पैसे मांग रहा था, पर मैने नहीं दिये।"
"शाबास,ठीक किया।"
"पर वह माना कहाँ, मेरा बैग ढ़ूंढ़ लिया पर उसमें कुछ नहीं मिला तो मार- पीट करने लगा।"
"तो तूं चुपचाप सहती रही।"
" हाँ बीबी जी, उसके चीखने- चिल्लाने की आवाजें पूरी चाल में गूंजती रहीं, पडोसी सब देखते रहे पर कोई आगे नहीं आया।"
"किसी को तो बीच में आना चाहिये, यह घरेलू हिंसा है कमला, आजकल इसके विरोध में आवाज उठाने की मुहिम चल रही है।"
"कोई बीच में क्यों आायेगा बीबी जी हम सभी के घर तो इसी कच्ची मिट्टी के हैं ।"
"कमला तुम खुद को मजबूत करो और पड़ोसियों को भी जोडो, उनकी सहायता करोगे तो वे भी तुम्हारी सहायता करेंगी।"
"जी मेम साब।"
"क्या जी मेम साब, समझ आया कुछ?"
"हाँ बीवी जी अब न अन्याय सहेंगे न किसी को सहने देंगे।"
पवन जैन,जबलपुर ।