मेरी जिंदगी में अब कोई न ख्वाब है ।
मेरी खामोशियाँ ही मेरा जवाब हैं ।।
सबके अपने दायरे , अपना हिसाब है ।
मेरी जिंदगी भी एक खुली किताब है ।
वो गुल नही गुलशन कहें या आफताब कहें ,
अपने चमन का वो अकेला गुलाब है ।
दिल के आइने में जरा झाँक लो ऐ दोस्त!
उनके चेहरे पर रहता हरदम नकाब है ।।
इस जहाँने - महफिल में छाया है जो शुरूर ,
कहीं गीत ,गजल औंर कहीं छाया शबाब है ।