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ये लड़कियाँ भी ना••••••
बाबूजी आपका सारा सामान पैक कर दिया है कुछ और हो तो बता दीजिएगा- बैठक से रश्मि बाबूजी को आवाज लगाकर कहती है।
बाबूजी बाथरूम से नहाते हुए ही रश्मि से कहते हैं कि - अरे बेटा रश्मि मेरी वह गर्म पानी की बोतल रखना मत भूलना ।तुम तो जानती हो कि मुझे ठंडा पानी सूट नहीं करता।
रश्मि - हां-हां बाबूजी सब रख दिया है। आप कहे तो खाना भी रख दू।
बाबूजी - नहीं खाना नहीं। बस थोड़ी दूर का ही तो सफर है। अब मेरठ से दिल्ली है ही कितनी दूर और नाश्ता तो मैं खाकर ही जाऊंगा।
बाबू जी नहा धोकर स्टेशन के लिए रवाना होते हैं। लेकिन थोड़ी देर बाद ही बाबूजी पेट पर हाथ लगाकर बैठ जाते हैं। और इधर-उधर नजर दौड़ाते हुए सोचते हैं कि काश में रश्मि बेटा की बात मानकर खाना ले आता तो अच्छा रहता ।तभी बाबूजी की फोन की घंटी बजती है। बाबूजी फोन उठाते हैं और रश्मि उनसे कहती है कि बाबूजी खाना आपके बैग में रखा हुआ है। भूख लगे तो खा लीजिएगा और यह कहकर फोन रख देती है। बाबूजी फटाफट बैग टटोलते हैं। और उसमें खाने का टिफिन देखकर उनके चेहरे पर चमक आ जाती है।वो पेट भर कर खाना खाते हैं ।और मुंह से एक लंबी सांस लेते हुए सोचते हैं कि यह लड़कियां भी ना पता नहीं कैसे हर एक बात को जान लेती है।
नेहा शर्मा।