"चाहत उनकी होठों पर जो दबी सी है,
क्या कहें उनको,अपनी जिंदगी थमी सी है ।
हुस्न यार देख चाँद भी शर्मा गया ,
धड़कनें इश्क में खलबली सी है ।
खुशबू बसती है उनकी हवाओं में ,
जाने कैसी छायी ये बेखुदी सी है ।
लब दिल की बातें जुबां से कहते नहीं ,
इश्क की आग दोनों तरफ लगी सी है ।
बनके रहेंगी दास्तान -ए -मुहब्बत उनकी ,
अब क्या कहें उन्हें वो तोअल्हड़ नदी सी है।"