इन्सान कहा है हम?
जैसे चलती फिरती किताब है.
तू आगाज़ तो कर पढ़ना एक दूसरे को..
हर एक चेहरे पर,कहानिया बेहिसाब हे..
कुछ किरदार हर पन्ने पर छाये हैं..
कुछ किरदार तो सिर्फ अधूरे से साये हे..
कुछ किरदार की क्या बताव..बाते क्या लाजवाब है।.
इंसान कहा है हम?जैसे चलती फिरती किताब है..
कुछ पन्ने आधे फटे हे...
कुछ पन्ने आंसू से गीले हे..
कुछ पन्ने को पढ़ने को,हर ज़हन बेताब हैं..
इंसान कहा है हम?जैसे चलती फिरती किताब है..
कुछ दस्तानन मुक्कमल लिखी है,
कुछ किस्से अधूरे ही सही है...
कुछ पन्नो पे छुपे,यादो के सुर्ख गुलाब हैं...
इंसान कहा है हम?जैसे चलती फिरती किताब है..
आगाज़ तो कर पढ़ना एक दूसरे को,हर पन्ने पर कहानिया बेहिसाब हैं..
Anv◆