एक व्यक्ति किसी कार्यक्रम में स्पीच दे रहा था। उसने स्पीच के दौरान कुछ चंद पंक्तियां प्रस्तुत की। लाइने कुछ इस तरह थी।
हम उगलते हैं तो, भूचाल उगल जाता है।
हम मचलते हैं तो, तूफान मचल जाता है।
कोशिस ना करो हमें बदलने की क्योंकि,
हम बदलते हैं तो पूरा इतिहास बदल जाता है।
उसी दौरान उसके सामने से उसके पापा गुजरते हैं। वह यह पँक्तियाँ सुनते हैं और उसे रहा नहीं जाता।और उसके मुंह से निकल जाता है, " पहले अपनी कुटिया बदल फिर इतिहास बदलने की बात करना। पता नहीं कब वह गिर पडे और हम बेघर हो जाएंगे।
-इतरकाका