आप कुछ भी न हो, पर आपके पास सबकुछ नॉलेज हो, आप के कुछ होने के सिवा,
मत समजा ने जाना दुनियादारी दुनिया को,
पर यदि आप कुछ हो और आपके पास कुछ नॉलेज न हो,
बिना सबकुछ के, तब भी दुनिया स्वीकार लेती है,
इस से ये पता चलता है कि यहां इंसा कि नहीं बल्कि उसकी इम्प्रैशन (वो क्या है बिना जाने कि उसके पास कितनी नॉलेज है) वैल्यू होती है,
तो इसका सार है,
पहले कुछ बने, तभी आपकी नॉलेज कि वैल्यू सही मायने में ये दुनिया को समझ आएगी।
वैसे तो दुनियादारी कि कोई किंमत नहीं होती,
पर अगर कुछ बन जाओ तो दुनियादारी क्या होती है,
उसकी किंमत का पता बखूबी चल जाता है,
वरना ये दुनिया है साब सबकी किंमत और सबकी औकात वक़्त आने पर पता ही देती है, कि ये बिकेगा या नीलाम होगा।
Written By : Kubavat Gaurang