वाह!
पुनश्च :
मेरे सुबह औ शाम की
रंगत को जैसे ठग गयी,
चाय की तासीर जब से
इस जुबाँ पर लग गयी ।
होंठ के नजदीक लाकर
चूमना वो प्याले को,
इस तरह मदहोश करता
शख्सियत ही ढक गयी।
इश्क़ अब हम क्या करेंगे
जूठे होंठों को लिये
इस नशे में मेरी हर
रंगीनियाँ धिक धिक गयी ।