पुछा मैने आज एक सवाल खुदासे,क्या मांगु में आज एक दुआ तुझसे ......उसने मुस्कुराकर कहा, क्या कुछ ऐसा भी हे जो पूरा ना हुआ हो मुझसे ,मैंने कहा एक ऐसी चीज जो दुनिआ में प्यारी हे सबसे ,उसने कहा कोनसी चीज ? मैंने कहा ,वो चीज जो पाक है इबादत की तरह .....जो साफ़ है पानी की तरह .......जो बेहद है इन बादलो की तरह .......जो गेहरी है समंदर की तरह , वो एक ग़ज़ल है भरी महफ़िल की .........वो शायरी है किसी शायर की ........वो चाँदनी है इन तन्हा रातोंकी,वो खिली मेहंदी है किसीके कोमल हांथोकि .....वो है इक रौशनी उस उगते हुए सूरज की ........वो है इक खुशबु भीगी हुई मिट्टीकी ,कोई कहता इसे पागलपन है ,तो कोई कहता इसे अंधापन है ,पर फिर भी ये नाजाने क्यों ...हर धड़कते दिल की धड़कन है , और केहता इसे ज़माना "मोहोब्बत" है .सुनकर मेरी बातें हैरान होकर उसने पुछा , क्या सचमे तेरी मोहोब्बत में इतनी शिद्दत है ? मैंने कहा .....आंखोकी वो मेरे राहत है...इस दिल की बस वही इक चाहत है....किसीके लिए हो ना हो , पर मेरे लिए वही मेरी जन्नत है.....वही मेरी जन्नत है !