कुछ आहटें घुटन की
भीतर होती है तो दबा दी जाती है
कुछ मौसम उदास लगते भी है तो
कहकहे लगाकर कोशिश होती है
उन्हें खुशगवार करने की
मन के मौसम भी अजीब होते है
इंसान की फितरत से रंग बदलते है
फितरते पहचानना मुश्किल होता है
नामुमकिन कतई भी नही
जरुरत सजग रहने की
कुछ अपने भी पराये होते है
कुछ पराये भी अपने होते है
और कुछ न अपने न पराये
फिर भी ढोते है हम उन रिश्तो को
जरुरत होते हुए भी उतार फेंकने की
जीना क्या है मृत्यु तक का सफर
मृत्यु क्या है चोला बदलने की डगर
उम्र भर झंझावातों से झूझते उबरते
काश उफ़ की उसाँसे भरते है कभी
जरुरत स्व की पहचान भर करने की
#निविया
#नीलिमा