युद्ध के मैदान में मै खड़ा चारो तरफ कोलाहल से भरा माहौल। धाय धाय गोलिया चल रही गोले बारूद चल रहे है। दुश्मन की गोली चारो तरफ से आ रही दाए से बाए से आगे से ऊपर से।मेरा कप्तान मेरे पर बरस रहा है गोली चला, बुत क्यों बना खड़ा है,मर जाएगा तू।चारो तरफ भारी उपद्रव हो रहा है।
मै खड़ा बीचों बीच युद्ध के मैदान में अपने ही द्वंद में फसा फड़ा हूं।सामने दो महापुरुष खड़े है।एक बोलता है लड़ क्योंकि लड़ना ही तेरा धर्म है।याद रख तू नहीं लड़ेगा तो कोई और लड़ेगा पर फिर तू नरक में जाएगा।तेरी पुस्ते तुझे धिक्कार देंगी। तू कायरो के श्रेडी में आयेगा।
फिर दूसरे महापुरुष कहते है मानवता मारने में नहीं क्षमा करने में है।वो महान कहलाता है जो दूसरो को क्षमा करता है,युद्ध के मैदान में भी दुश्मन को गले लगा लेता है।तुम्हे याद है ना उंगलिमाल जैसे भयंकर दानव को भी मैंने क्षमा भाव से जीत लिया था,बदल दिया था।किसी को मारने वाला कहीं नहीं पहुंचता वो अपने ही नजरो में गिरता है।
आगे की कहानी नहीं लिखूंगा कि क्या हुआ।
वो आप पर छोड़ता हूं।
#द्वंद