वो *साँसे* अपनी रोक कर तुझे छूने की तमन्ना,
और हल्का सा छू कर खुशी खुशी लौट आना मेरा,
यूँ लगा कि जैसे सारा जहाँ *जीत* लिया हो....!
जब बाँधा मुझे अपनी बाँहो में न छूटने के लिए....
लगा सब कुछ *हार* चले हम.....!
....
इसी को *कब्बडी* कहते है !
कभी खेल कूद भी लिया करो *मोहब्बत* के मरीजो !!
*खेल मंत्रालय भारत सरकार* !
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