नम क्यों है तेरी आँखें?
तू डरी सहमी सी क्याें है?
खुद को भुलाकर, तू हताश क्यों है?
ये वक़्त नही रोने का, ये वक़्त है कुछ कर दिखाने का।
खुद को जान और अपनी राह पकड |
ये आसमान तेरी मर्यादा, ये जमीन तेरा जमीर है।
ये समंदर तेरी कहानी, ये नदी तेरा सफर है।
तू धरोहर है पवित्र अग्नि का, तू ही जीवनदाता जल है।
खुद के अंदर झाँक कर देख, पूरी दुनिया तुझ में ही है |
चल उठ अब, खुदको तू रोख मत।
तुझे तेरी जरूरत है, आ जिंदगी का हर पड़ाव जीत ले |
~अंजुश्री |