हम क्या करें, जब तुम भूलते नहीं
जब सामने होता हूँ, तो कुछ बोलते नहीं।
शर्मीला हूँ मैं, जरा खुल नहीं पाता
मजबूर हूँ मैं, तुम्हें भूल नहीं पाता।
दोस्तों के कहने पर, एक-आध पैग भी लिया
ठाना आज तो मन की बात करूँगा,
पर नशे के आगोश में मैं बेहोश हो गया
सरे राह इस क़दर मदहोश हो गया,
कि तुम तुम ना रहे, मैं मैं ना रहा
नशा से प्यार का रिश्ता बना लिया,
आज भी जब तुम मुझे तकलीफ देती हो
तो खुद मेरेे कदम बहक जाते हैं
बदनाम हूँ बदनामियों से डर नहीं लगता
जीने के लिए होंट वहीं अटक जाते हैं,
हाँ जीने के लिए कदम मेरे बहक जाते हैं।।।