रामायण के पात्र दसरथ ही शब्दभेदी बांण चलाना जानते थे, दस+रथ अर्थात 5 कर्मेंद्रिय और 5 ञानेंद्रिय, अर्थात आज हर इंसान के पास 10 इंद्रिय हैं, अत: हर इंसान जिस व्यक्ति को लक्छित कर शब्द रूपी बांण छोड़ता है, वह बोल उसे ही लगते हैं, बस हमें ध्यान इस ओर देना चाहिए, कि यह शब्दभेदी बांण, किसी का दिल न दुखाऐं, बल्कि समस्या का समाधान दें.