गिर रहे हैं आँसू
मैं क्या करूं खुदाया।
जो मेरा हमसफर था
वो हो गया जुदाया।।
भीड़ में चली मैं
रास्ते क्यूं गुम हैं।
भटक रही मैं ऐसे
तू देख के भी चुप हैं।
दर्द मेरे दिल का
कैसे है छिपाया।
गिर रहे हैं आँसू
मैं क्या करूं खुदाया।
जो मेरा हमसफर था
वो हो गया जुदाया।।
हाल मेरा पहले
न था कभी भी ऐसा।
क्या खता थी मेरी
जो दिल तू मेरा तोड़ा।
मैं मस्त अपनी धुन में
क्यूँ स्वप्न ये दिखाया।
गिर रहे हैं आँसू
मैं क्या करूं खुदाया।
जो मेरा हमसफर था
वो हो गया जुदाया।।