वैसे तो काम हाथ लीया न जाता अगर ले भी ले तो ना कीया तो इज्जत क्या रहेगी ? छोड कर चले गए तो ? गुस्सा हो गए तो ? ऐसी सब वजहों से काम लेने से कतराया जाता है | " ना" नहीं होगा ऐसे भी बोलना सीखना चाहिए | पर उसके बदले काम से दुर भागने का मन होता है या टालते है | काम न कर पाने की वजह दे-दे तो कोई न कहें करना ही पडेगा | पर वजह भी अच्छी होनी चाहिए | ये नहीं कि आलस है या फिर पैसे नहीं | जीस को करना होता है वो बीना पैसों के या बिना महेनत भी काम करवा लेता है | पर करवाने वालों को भी तो वजह बतानी पडती है तब ही तो काम करते है | पर कुछ भी करो काम करना होता है वो भी अपने लिए | कुछ काम ऐसे होते है जो खुद के अलावा कोई न कर सके | जैसे कि खाना चाहिए तो बोलना पडता है भुख लगी खाना दो और कोई जबरदस्ती करता है एक रोटी तो खानी पडेगी तो क्या जबरन खाते है !?! नहीं ना या मान रखने को चख लेते है | तो बस उतना ही आसान है |...ॐD