भाई का ना भाई से प्यार कम हुआ ना मां-बाप से प्यार कम हुआ पर आलस अपना काम कर गई | पर क्या था आलसने चाहा वही तो हुआ | बीवी लाई थी अपने साथ लालच भरी निगाहें धीरे धीरे पति को वश में कर लालच का जाम पिला काम का बोझ बढ़ा केहकर फर्ज से मुक्ति लेनी चाही | हुआ बिल्कुल वैसा ही, पर दिल को दिल ने पुकारा था इसलिए ज्यादा दूर ना ले जा पाए | पास थे पर साथ नहीं थे | चाहिए था बीवी को ऐशो आराम काम से मुक्ति पर क्या हुआ अपना ही बोझ बढ़ा लिया | फिर धीरे धीरे बच्चों को स्वतंत्रता दी तो उन्होंने अपनी तरीके से जीना शुरू कर दिया, क्योंकि देखा नहीं ना कभी माता पिता को काम करते, इसलिए वो भी काम के आलसी हो गए | पर क्या था काम तो काम होता है आज नहीं तो कल करना होता है उस हिसाब से काम मिला जिम्मेदारी मिली | बहु की बारी आई सांस बनने की बेटे के घर बहू आने वाली थी बहू भी बड़ों का आदर सम्मान उतना कुछ खास ना करती थी | पहली बार जब ससुराल आई होने वाली सांस नीचे बैठी है और खुद सोफे पर जा बैठी | बस फिर क्या था जैसा बोया था बहू बन वैसा सांस बन मिलना ही था | जीतने ही दूर गए उतना ही दिल ने दिल को पुकारा | भाई ने भाई को याद किया | पर अब दो दिल के बीच एक पुल का निर्माण हो चुका है बस उस पर चल कर एक दुसरे से मीले की देरी है | प्यार से रहे, खुश रहें | हर कीसीको अपनी मर्यादा का ख्याल होना चाहिए पर जब खयाल नहीं रेहता तो उस पर अंकुश लगाने वाला चाहिए तो हर किसी के लिए ऐसा अंकुश बना होता है | की राह भटके नहीं |...ॐD