बेटियाँ
ये घर तेरा नहीं है
पति का घर ही है तेरा घर
कहकर ये
बेटियों को पराया कर देते है हम
चली जा अपने पिता के घर
ये घर तेरा नहीं
बोलकर सात फेरे भूल जाते है हम
अकेले घर से बाहर नहीं जाना
लड़की समझ कर
अबला बना देते है हम
इसके बस की नहीं है आखिर
लड़की ही तो है
क्या कर पायेगी
जानकर कमज़ोर बना देते है हम
कैसे बन पायेगी बेटियाँ
हिम्मत वाली
उनकी हिम्मत तो खुद तोड़ देते है हम!!