रास्ते है जो यह मेरे सेहर हर के
रह गए रिश्ते इनसे बिखर के
यू तो है पहचान रोज की
फीर क्यों मिलते रोज अंजाने बन के
केहते हैं मुझसे, एक बात खुलके
दोहराते हैं वही यह हर एक से
हूँ में राही तेरा ही रास्ता
बंधा नहीं मैं फिर भी किसी से
रहता हू साथ आख़िरी तक
धूप छाऊँ भी संग सेहता हू तेरे
फिर भी प्यार सिर्फ मंज़िलो से तुझे क्यूँ
पूछे मुझसे, यह रास्ते मेरे सेहर के
यू तो है पहचान रोज की
फिर भी मिलते रोज अंजान बन के
'मुझे भी कभी अपना ओ राही'
कहे मुझसे, यह रास्ते मेरे सेहर के