भरी सभा में बहुत विद्वान हैं
पता नहीं क्यों
कोई शकुनि बन रहा है,
कोई दुर्योधन दिख रहा है
कोई दुशासन की मुद्रा में है।
पितामह भीष्म लाचार
गुरु द्रोणाचार्य अनभिज्ञ बने हैं।
राजा अंधा है
पर सत्ता पर शतप्रतिशत बैठा है।
धर्मराज द्यूत क्रीड़ा में लगे हैं,
कलियुग , राजा परीक्षित के मुकुट में बाद में बैठा है,
लेकिन जुआ तो द्वापर में
कृष्ण भगवान के समय खेला जा रहा है,
अन्ततः, महाभारत तो होना ही है।
**महेश