कुछ दुनिया हो मेरे मन की
कुछ दुनिया हो तेरे मन की,
कुछ बर्फ गिरे तेरे मन की
कुछ बर्फ गिरे मेरे मन की।
कुछ ऋतुएं आयें मेरे मन की
कुछ ऋतुएं आयें तेरे मन की,
कुछ गुनगुनाहट हो मेरे मन की
कुछ गुनगुनाहट हो तेरे मन की।
कुछ जीवन हो मेरे मन का
कुछ जीवन हो तेरे मन का,
कुछ मुस्कान आये मेरे मन की
कुछ मुस्कान आये तेरे मन की।
कुछ बर्फ पिघले तेरे मन की
कुछ बर्फ पिघले मेरे मन की,
कुछ धूप निकले मेरे मन की
कुछ धूप निकले तेरे मन की।
***महेश रौतेला