अभी-अभी मैं जूझ रहा था
अभी-अभी मैं नाच रहा हूँ,
कितने कदम गिन आया हूँ
कितने कदम छूट गये हैं।
कहाँ-कहाँ से टूटा हूँ
कहाँ-कहाँ से जुड़ा हुआ हूँ,
कब आँधी आयेगी
कब आँधी रूक जायेगी।
अभी-अभी मैं जूझ रहा था
अभी-अभी मैं नाच रहा हूँ,
अभी- अभी सुबह थी
अभी- अभी शाम है।
*महेश रौतेला