अब उड़ने को तैयार हूँ
मेरी छलांगों को मत देखना,
हिमालय तक पहुंचा हूँ
मेरी थकान को मत पूछना,
गंगा पर खड़ा हूँ
मेरी आस्था को मत रोकना।
भारत का नागरिक हूँ
मेरी भाषा मत पूछना,
मन ही मन गुनगुनाता हूँ
मेरी तलाशी मत ले लेना।
मैं चंचल एक राहगीर हूँ
मेरी मंजिल मत पूछना,
प्यार और ममता का संगम हूँ
मेरे विश्वासों को मत तोड़ना।