लौट रही हैं मेरी यादें
शाम की चिड़ियों की तरह,
उठा हुआ है अभी तक उजाला
माँ की भाँति किसी को जगाने के लिए।
लोग आन्दोलन कर रहे हैं,
सड़क के लिए, पेड़ों के लिए,
पर्यावरण के लिए, रोजगार के लिए,
लगा उठा हुआ है अभी तक उजाला,
माँ की भाँति लोगों को जगाने के लिए।
***महेश रौतेला