लफ़्ज़ों में जो न कहां उन्होंने
उनकी आंखें बयां कर गई
वो फासले बढ़ाते रहे लेकिन
तकदीर हमें नजदीक लाती रही
वो मजबुर थे अपने हालात से
हम मजबुर थे अपने दिल से
ये मजबूरियां हमें करीब लाती रही
चाहत तो उनके दिल में भी थी
पर वक्त सही न था
सही वक्त की राह में दिल तडपता रहा
ये तड़प ही प्यार बढ़ाती रही
उनके आने की उम्मीद है अभी भी दिल में
ये उम्मीद ही जीने की चाह बढाती रही...