जिंदगी क्या है
जिंदगी धूप भी है, जिंदगी छांव भी है।
जिंदगी फूल भी है , जिंदगी शूल भी है।
ये तेरे जीने के अपने तरीके हैं,
धूप में छांव का और शूल में फूल
का मजा कैसे लेना है।
कोई अपने लिए जीता है,
तो कोई अपनों के लिए जीता है ।
कोई रो- रो के जीता है ,
तो कोई जीने के लिए रोता है ।
जीवन की कीमत उनसे पूंछो ,
जो बड़ी-बड़ी बीमारियों का शिकार हैं
और हम छोटी-छोटी परेशानियों से बीमार हैं।
जब जीना हर हाल में है
,तो मुस्कुरा के जियो और
दूसरों के भी जीने की वजह बनो।
सीमा शिवहरे" सुमन"