माफ़ करना,रुकावट के लिये खेद है
क्यों की दिल मेरा अभी अस्त व्यस्त है।
हस्ता रहा हु में जीवन भर इतना,
के आज आँख पुर से असर ग्रस्त है।
नही था वास्ता मेरा गमो से दूर तक,
आज वही ज्यादा मेरा किरीबि दोस्त है।
शिकवा करू या,दू दुहाई जिंदगी,
जो नही था तेरा वही आज वक्त है।
हस्ती हुई आँखों में नमी कभी तो आती हे,
बिना उसके प्रतिक जीना कहा मस्त है।
Dp,"प्रतिक"