हिमालय की ओर जब भी गया
अपूर्व शान्ति तैरती
नजदीक आ, आँखों से लड़ने लगी,
विश्वास ही नहीं हुआ कि शान्ति भी लड़ सकती है,
जैसे महाभारत युद्ध में कृष्ण भगवान शान्त दिखते हैं,
निशस्त्र युद्ध में होते हैं।
जब अक्षौहिणी सेनायें मर जाती हैं,
तब भी स्वच्छ और शान्त दिखते हैं।
एक पहाड़ सागर से निकल
बहुत ऊँचा हिमालय हो गया है,
हिम से जब ढका,
बहुत महान हो गया है।
हिमालय की ओर जब भी गया
अपूर्व शान्ति तैरती, दुबकती
मेरे अहं को मारती गयी।
गंगा हिमालय से पवित्र होकर ही निकली,
फिर हिमालय की पहिचान सागर तक ले जा,
मनुष्य से बड़ी हो गयी।
***महेश रौतेला