इस से पहले की मैं खुद से भी हार जाऊँगा
ज़िन्दगी तेरे भी एहसाँ उतार जाऊँगा
मार दूं कैसे भला अपने ही बातिन में जमीर
इस तरह जीत के ऐ दोस्त, हार जाऊंगा
कुछ मेरे शेर, मेरी सोच, मेरे अफ़साने।
दे के दुनिया को यही यादगार जाऊँगा
मेरे मलबूस* पे रोती ही जायेगी दुनिया
और मैं जिस्म को हंस कर उतार जाऊँगा
*कपडे
हक़ बयानी* के तराने ही गा रहा हूँ मगर।
जल्द इस शहर से भी संगसार^ जाऊँगा
* सत्यनिष्ठ ^ लहूलुहान
ज़िन्दगी गम की हिफाजत में काट दी मैंने
मैं तो महबूब यूँ ही बेकरार जाऊँगा
महबूब सोनालिया