#kavyotsav
'क्या यही इश्क है?'
सन सन आंधी थी
थे देखो काले बादल
बाती अभी बाकी थी
नहीं बुझा उसका आंचल
क्या यही इश्क है ?
आतिश यह अंधेरों में भी
देखो जलती ही रहती है
ऊंच-नीच की दीवारों में भी
यह सांसे जिंदा ही रहती है
क्या यही इश्क है?
आईना भी अब इन आंखों में
हमदम को ढूंढता है
सनम का हाल अब दिल ए
सासो से सुनता हे
क्या यह इश्क है ?
सागर जैसी आंखों को
साहिल बन कर सुनता है।
अंधेरों को छीन के यह
दिल में साहस को पुरता है।
प्रेम देखो यह वीर है
प्रेम भी कागज में लिपटा हम जैसा पीर हैं।
यही इश्क है।
#kavyotsav