#kavyotsav
काँटों का हुनर
फूलों को काँटों का हुनर सिखाया किसने ।
ओ तो कोमल थे चुभना बताया किसने ।।
वतन की अखंडता पर किसका प्रहार है ।
मासूमों को हिन्दू मुसलमां बताया किसने ।।
फूलों को ……………
कहीं अल्लाह तो कहीं राम बनाया किसने ।
हरा और केशरिया में फर्क बनाया किसने ।।
कोई अल्लाह या कोई राम मुझे जवाब तो दे ।
भाई को भाई के खून से नहलाया किसने ।।
फूलों को ……………
भारत के तिरंगे पे मुसीबत बड़ी है ।
उसके रंगों का बटवारा कराया किसने ।।
अब ओ हिन्दी को उर्दू से जुदा कर रहे हैं ।
उनको गन्दी सियासत सिखाया किसने ।।
फूलों को ……………
मेरे बचपन के दोस्त सब एक से दिखते थे ।
हमें यह ऊँच-नीच समझाया किसने ।।
गोल टोपी में नमाज पढूँ या प्रातःकाल वंदन ।
हमारी ख्वाहिशों पर बंदिश-ए-कानून लगाया किसने ।।
फूलों को ……………
कोई कुर्बानी कहता है , तो कोई बली देता है ।
कहीं पर गाय , बकरा तो कहीं भैंसों के कातिल हैं।।
बेगुनाह हरिया को रौंद रौंद के मार डाला किसी ने ।
उस पर ये गो हत्या का इल्ज़ाम लगाया किसने ।।
फूलों को ……………
गरीबी रोज घर में एक निवाला कम ही खाती है ।
अमीरी होटलों में रोज दीवाली मनाती है ।।
कर्ज में डूबा हुआ हर रोम जिस पर हँस रहा होगा ।
उस हलधर का खलिहान जलाया किसने ।।
फूलों को ……………
मुल्क भुला नही अशफ़ाक , विश्मिल की शहादत को ।
फिर से आजाद , राजगुरु और भगत सिंह याद आये हैं ।
जिसने बेटों की लाशों पर लिखा दस्तूर भारत का ।
उस मानवता के मशीहा का पुतला गिराया किसने ।।
फूलों को ……………
-कवि पन्ना