# kavyotsav
विषय- भावना
कविता का शीर्षक-अभाव
मेरे पास अलफाज़ नहीं हैं
वरना मैं ज़रूर लिखता
एक गीत तुम्हारे नाम-
जिसे सुनकर
तुम अपने फटे कुर्ते को
सीतीं हुई
एकाएक मुस्कुरा पड़तीं,
और भूख से मचलते हुए
अपने बच्चे की रोटी
मांगने की ज़िद पर
झुंझला कर
उसे थप्पड मारने की
बजाए
ममत्व से उसे अपने सीने
से भींच लेतीं
फिर मेरी नज़र के
आमन्त्रण पर
मुस्कुराते हुए मेरे सीने पे
सिमटकर
मेरी कमीज़ के उधड़ते हुए
कालर को
अपनी हथेली से छिपा
लेतीं।
मेरे पास अलफाज़ नहीं हैं
वरना मैं ज़रूर लिखता
एक गीत तुम्हारे नाम-
जिसे सुनकर
घुप अन्धेरी रात में
तुम्हारे थरथराते हुए हाथ
से
टिमटिमाती टीन की
डिबिया
की लौ भड़भडा जाती
और पहली रोटी
गर्म तवे पर पड़े-पड़े
जलांध देने लगती।
मगर तुम जागी आँखों से
सपने बुनती रहतीं
मेरा गीत सुनकर
मेरे पास अलफाज़ नहीं हैं
वरना मैं ज़रूर लिखता
एक गीत तुम्हारे नाम.