#Kavyotsav
बारिश का मौसम
कुछ काम कर ही लेता हु,
ये सोच तो में रहा था,
पर नज़रअंदाज़ बारिश को को नहीं कर सकता था.
बुँदे गिरती, गीला करती थी ज़मीन,
पर रोक नहीं सकती थी,
सूखने से दिल की ज़मीन.
पानी जो गलियों में बहता था,
प्यार मेरे दिल में उभरता था.
वैसे तो था में अकेला,पर,
खुद को साथ पा रहा था तेरा.
है कहा तु, अब तु बता दे,
ढूंढने को तो अब नज़र है तरसे.
टिक नहीं सकती ये कही भी,
कहती है बस तेरी बाहो में है बरसे.