यादें...!
कुछ पुरानी यादें आज आँखों को नम कर गयी,
परत दर परत प्याज के छिलके उतारती गयी |
आँखोंसे गिरती बूंदे किसीकी याद दिलाकर गयी,
मानो समंदर का पानी जुबांपर चखाकर गयी |
वैसे तो ख़ामोश रहती हैं साँसे,
आज कोहराम मचाती गयी |
किसी की याद रुलाकर गयी तो किसीकी हँसाती गयी |
वो न जाने कितने किरदार यादोंकी गलियोंमें खो गये |
मंजिलें तो पा ली मग़र तनहाई साथ रह गयी |
कुछ पुरानी यादें आज आँखों को नम कर गयी,
परत दर परत प्याज के छिलके उतारती गयी |