कैसे करु मैं सुक्रिया अदा,
उपकार हैं मुझपर आपके ।
पत्थर से बनाया मुझको हीरा,
हाथो से अपने कुतरके ।
सजा दी मुझको गलती की,
दुनियादारी का पाठ सिखाया ।
सबक , शिक्षा , प्यार ,दर्दसे ,
इस अंजान को वाकेफ़ कराया ।
मकसद नहीं था जीवन में कोई ,
खुदके अंदर जांखना सिखाया ।
डर डर कर जीता था मैं हरदिन ,
हर डर से लड़ना सिखाया ।
तरक्की हुई जब जब मेरी ,
मेरी पीठ को थपथपाया ।
पहुंच गया आसमान पर में ,
फिर भी जमीन से जुड़ना सिखाया ।
100 शब्द कम हैं बहुत ,
लिखनी चाहिए किताबें आप पे ।
कैसे करूँ मैं सुक्रिया अदा ,
उपकार है मुझपर आपके ।