मैंने कब, कहाँ किसे चाहा
कब आँखों में शब्द भरे,
जो सामने था खड़ा, खड़ा
वह कब, कहाँ मेरा था?
कब गंगा से बात किया
'हर-हर गंगे,हर-हर गंगे'।
कब हिमालय को आवाज दिया
कब भारत की गूँज सुनी
कब झंडे से लिपट गया,
कुछ याद रहा, कुछ भूल गया।
देश यहीं से आरम्भ हुआ
देश यहीं पर रोया है
आँसू महाभारत में जो गिने गये
कृष्ण कहे वे उनके थे।
धरती पर जो आघात लगे
किसने कहा किसके थे?
कौन उठा, कौन बैठ गया है
हमने क्या चाहा, क्या बदल गया है?
***महेश रौतेला