पूरी कायऩात हमेशा बैठी है ......दो प्यार करनेवालो को मिलाने के लिए.....हम दोस्तो की दोस्ती का क्या?.....नेट से निकालकर .....हमें...आमनेे-सामने मिलाने के लिए....एकदूसरे को हक से मिलाने के लिए....दिल की दस्तके सुनने-सुनाने के लिऐ ....क्या कोई कायनात नही बनी?.....या फीर हम दोस्तो को....शमा पे परवाने की तरह जलकर मर मीटने की ....अजीब सी तिश्नगी हो गई है?.....मीस.मीरां......