जीवन की आपाधापी में व्यक्ति अपने होने के प्रमाण जुटाता रहता है..पैसा, पद, पहचान, प्रशंसा, रिश्ते और एक दिन सबूतों का ढेर लग जाता है लेकिन इन सबके बिना व्यक्ति कौन है?
दूसरों को अपना परिचय समझाते समझाते, वह स्वयं का परिचय नहीं..वस्तुओं, उपलब्धियों और परिस्थितियों का परिचय देता है।