Social Media पर अपने दुख के बारे में रोने से कोई समाधान नहीं मिलता। सच तो यह है कि ज़्यादातर लोगों को फर्क नहीं पड़ता। और कुछ लोग आपकी परेशानी देखकर खुश भी हो सकते हैं।
इसलिए सहानुभूति की आशा में अपना दुखड़ा मत रोइए।उसे समझिए, स्वीकारिए और उससे बाहर निकलने का रास्ता खोजिए।