🌸पाजेब की झंकार🌸
तेरे पैरों की पाजेब की तान कुछ कह रही है, छनक-छनक ये पायल की झंकार कुछ कह रही है।
कब तक खेलूँ मैं घुँघरुओं से यूँ अठखेलियाँ, पिया, अब तो कर लो प्यार—बहार कुछ कह रही है।
है इशारा मेरी आँखों की शरारत में, तेरी साँसों की महक दिल को पुकार कुछ कह रही है।
मेरी चूड़ी की खनक जब रात खनकती है, होती चाँदनी भी जैसे बेक़रार कुछ कह रही है।
तेरे आने से महक उठता है मेरा हर मौसम, हवा छूकर मेंरी ज़ुल्फ़ों को प्यार कुछ कह रही है।
लब खामोश हैं फिर भी दिल की बातें साफ़ हैं, तेरी धड़कन मेरी धड़कन से इकरार कुछ कह रही है।
कब तलक यूँ दूर रहकर इश्क़ को तड़पाएँ हम, मिलन की ये रात हमसे बार-बार कुछ कह रही है।
‘सागर’ अब तो छोड़ दे ये चाँद-सितारों की बातें, तेरी महबूबा तेरी बाँहों का हार कुछ कह रही है।
✍️बेनी सागर