ये पल यूँ ही गुजर जाएगा
उदासियों के काले बादल,
छाए हैं जो आज गगन पर,
छँट जाएँगे धीमे-धीमे,
सूरज फिर मुस्काएगा।
धीरज धर ओ राही मन तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
जिस धूप से जलती है काया,
वही तो फल को पकाती है,
जिस राह में बिखरे हैं काँटे,
वही तो मंज़िल तक जाती है।
अँधेरी रात का अंतिम पहर ही,
नया सवेरा लाएगा,
तू हार मत मान ऐ परिंदे,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सुख की सरगम, दुख की रोदन,
जीवन के दो रूप यही हैं,
छाँव कभी तो कभी है धूप,
जग के शाश्वत रीत यही हैं।
चक्र समय का घूम रहा है,
जो आया है वो जाएगा,
ना ठहर सका है काल कभी,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
तू क्यों चिंता के सागर में,
व्यर्थ स्वयं को डुबो रहा?
बीत गए जो दिन कल वाले,
उन्हें याद कर क्यों रो रहा?
आज जो तेरा अपना है,
कल कोई और ले जाएगा,
बहा ले हँसी की नदियाँ तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सपनों के जो महल ढहे हैं,
फिर से नई नींव धर ले,
टूटे पंखों को समेट कर,
अंबर की फिर उड़ान भर ले।
ज़िंदगी नाम है चलने का,
ठहरा पानी सड़ जाएगा,
तू कदम बढ़ा आगे अपने,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
हँसकर सह ले हर बाण समय का,
यह भी एक इम्तिहान ही है,
जीत-हार तो एक पहेली,
संघर्ष ही पहचान ही है।
जब दुख के पर्वत पिघलेंगे,
सुख का झरना बह जाएगा,
मुस्कुरा कर कह दे ज़माने से,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
रिश्ते-नाते, मान और माया,
सब माटी का एक ढेला है,
आए थे हम अकेले जग में,
जाना भी तो अकेला है।
फिर किस बात का अभिमान करे तू,
क्या साथ तेरे जाएगा?
जो आज तेरा है, कल न रहेगा,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
चट्टानों को फाड़कर भी तो,
नन्हे पौधे उग आते हैं,
तूफानों से जो लड़ते हैं,
वही तो इतिहास बनाते हैं।
घबरा मत इस खामोशी से,
शोक का शोर थम जाएगा,
रख विश्वास तू अपने रब पर,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
हर शाम के बाद आती है सुबह,
हर पतझड़ के बाद बहार,
फिर महकेंगे उपवन तेरे,
फिर गूँजेगी कोयल की पुकार।
साँसों का यह अनमोल सफ़र,
धीरे-धीरे घट जाएगा,
जी ले हर लम्हा खुलकर तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
उदासियों के काले बादल,
छाए हैं जो आज गगन पर,
छँट जाएँगे धीमे-धीमे,
सूरज फिर मुस्काएगा।
धीरज धर ओ राही मन तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
जिस धूप से जलती है काया,
वही तो फल को पकाती है,
जिस राह में बिखरे हैं काँटे,
वही तो मंज़िल तक जाती है।
अँधेरी रात का अंतिम पहर ही,
नया सवेरा लाएगा,
तू हार मत मान ऐ परिंदे,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सुख की सरगम, दुख का रोदन,
जीवन के दो रूप यही हैं,
छाँव कभी तो कभी है धूप,
जग की शाश्वत रीत यही हैं।
चक्र समय का घूम रहा है,
जो आया है वो जाएगा,
ना ठहर सका है काल कभी,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
तू क्यों चिंता के सागर में,
व्यर्थ स्वयं को डुबो रहा?
बीत गए जो दिन कल वाले,
उन्हें याद कर क्यों रो रहा?
आज जो तेरा अपना है,
कल कोई और ले जाएगा,
बहा ले हँसी की नदियाँ तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सपनों के जो महल ढहे हैं,
फिर से नई नींव धर ले,
टूटे पंखों को समेट कर,
अंबर की फिर उड़ान भर ले।
ज़िंदगी नाम है चलने का,
ठहरा पानी सड़ जाएगा,
तू कदम बढ़ा आगे अपने,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
हँसकर सह ले हर बाण समय का,
यह भी एक इम्तिहान ही है,
जीत-हार तो एक पहेली,
संघर्ष ही पहचान ही है।
जब दुख के पर्वत पिघलेंगे,
सुख का झरना बह जाएगा,
मुस्कुरा कर कह दे ज़माने से,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
रिश्ते-नाते, मान और माया,
सब माटी का एक ढेला है,
आए थे हम अकेले जग में,
जाना भी तो अकेला है।
फिर किस बात का अभिमान करे तू,
क्या साथ तेरे जाएगा?
जो आज तेरा है, कल न रहेगा,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
चट्टानों को फाड़कर भी तो,
नन्हे पौधे उग आते हैं,
तूफानों से जो लड़ते हैं,
वही तो इतिहास बनाते हैं।
घबरा मत इस खामोशी से,
शोक का शोर थम जाएगा,
रख विश्वास तू अपने रब पर,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
हर शाम के बाद आती है सुबह,
हर पतझड़ के बाद बहार,
फिर महकेंगे उपवन तेरे,
फिर गूँजेगी कोयल की पुकार।
साँसों का यह अनमोल सफ़र,
धीरे-धीरे घट जाएगा,
जी ले हर लम्हा खुलकर तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
मायूसी के अंधेरे में भी,
उम्मीद की एक शमा जला,
जो रूठ गए हैं ख़्वाब तेरे,
उन्हें मनाकर फिर से चला।
अंगारों पर चलकर ही तो,
सोना कुंदन बन पाएगा,
हौसला रख तू अपने दिल में,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
वक़्त का दरिया बहता जाए,
कोई इसे रोक न पाए,
कितने आए, कितने गए,
कोई अपना निशान न छोड़े जाए।
फिर भी तू इस बहती धारा में,
क्यों अपना धीरज खोता है?
दुख की घड़ियाँ ढल जाएँगी,
जब नया प्रभात मुस्कुराएगा।
तू राह देखकर मत घबरा,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
जो खो गया वो लौटेगा नहीं,
जो पाना है वो आगे है,
सपनों की इस पतंग की,
उम्मीद ही तो धागे हैं।
जब तक साँसें चलती हैं तेरी,
तब तक आस बाकी है,
जीवन के इस समर में तू,
खुद से कभी न हारी है।
कल का सूरज फिर एक बार,
नई उम्मीदें लाएगा,
सबर रख ओ मन के पंछी,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
समय न रुका है किसी के लिए,
न ये कभी रुक पाएगा,
जो आज तुझे तड़पाता है,
कल वही सुकून दे जाएगा।
ज़िंदगी की इस कठिन किताब का,
एक पन्ना यह भी बीत जाएगा,
मुस्कुरा कर आगे बढ़ तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सार: समय कभी एक जैसा नहीं रहता। सुख हो या दुख, सफलता हो या असफलता—संसार का सबसे बड़ा नियम यही है कि "यह समय भी बीत जाएगा।" इसलिए हर परिस्थिति में धैर्य और आशा बनाए रखें