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भाई है दुनिया मेरी, माँ है जीवन की साँस, पिता हैं मजबूत छाया, थामे मेरा हाथ। कल कोई हमसफ़र बनकर जीवन में आएगा, जो उम्रभर मेरा हाथ थाम, मेरे संग चलता जाएगा। ❤️
यूँ ही नहीं जीवन यूँ ही नहीं बीत जाता, प्रेम यूँ ही नहीं हो जाता। हृदय यूँ ही नहीं टूट जाता, कोई यूँ ही विदा नहीं हो जाता। हर राह यूँ ही नहीं छूट जाती, हर मोड़ पर कोई यूँ ही नहीं मिल जाता। एक लब्ज़ कहे बिना कोई यूँ ही नहीं समझ जाता, हर रिश्ता यूँ ही हृदय में नहीं उतर जाता। जो कहे बिना अलविदा हो जाए, वह यूँ ही तो नहीं आता। कुछ लोग जीवन में यूँ ही नहीं आते, वे अपनी यादों की एक पूरी कहानी छोड़ जाते हैं।
प्रेम की परिभाषा प्रेम की आखिर परिभाषा क्या है, जो बिना कहे दिल में उतर जाए, क्यों जन्म से ही हम सबसे जुड़ते हैं, क्यों अपनों के लिए हर पल धड़कते हैं। माँ की ममता में प्रेम मिलता है, पिता के स्नेह में विश्वास मिलता है, दोस्तों के साथ में हँसी मिलती है, हर रिश्ते में प्रेम की झलक मिलती है। फिर क्यों कोई इतना अपना हो जाता है, कि उसके बिना मन उदास हो जाता है, वह दूर चला जाए तो आँखें नम होती हैं, और उसकी यादें हर पल संग होती हैं। क्यों दिन-रात उसी का ख्याल आता है, क्यों हर चेहरा उसी सा नज़र आता है, क्यों उसकी बातें मन में बस जाती हैं, क्यों उसकी यादें हमें तड़पाती हैं। शायद प्रेम वही एहसास है, जिसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं, जो पास हो तो जीवन मुस्कुराता है, दूर हो तो मन को चैन नहीं। प्रेम पाने का नाम ही नहीं, प्रेम तो निभाने का नाम है, किसी की खुशी में खुश हो जाना, और उसकी याद में भी मुस्कुराना ही प्रेम है। शायद यही प्रेम की परिभाषा है— जिसमें ‘मैं’ से पहले ‘तुम’ आ जाए, और कोई दूर होकर भी हमारे दिल के सबसे करीब रह जाए।
पास होने की क़दर जब कोई हमारे पास होता है, तो हम उसकी क़दर नहीं करते, उसकी खामोशी को अनदेखा करते हैं, उसकी मौजूदगी को आम समझ लेते हैं। लेकिन जब वही शख़्स हमसे दूर चला जाता है, तब उसकी हर बात याद आती है, उसकी हर छोटी-सी कमी खलती है, और हम उसकी यादों में ही डूबे रहते हैं। शायद यही इंसान की सबसे बड़ी भूल है— जो पास है, उसकी क़दर नहीं, और जो दूर हो गया, उसके बिना ज़िंदगी अधूरी लगती है।
इतना था तुमसे कहना, कान्हा, तुम बिना बताए चले गए कहाँ। कहाँ-कहाँ न ढूँढा तुम्हें, हर राह, हर मोड़ पर पुकारा तुम्हें। जहाँ कोई नहीं गया, वहाँ भी तलाशा तुम्हें। मुरली की धुन सुनने को तरसे नयन, हर पल याद किया तुम्हें। कान्हा, लौट आओ एक बार, तुम बिन सूना है मेरा संसार।
याद आए तुम इतने वर्षों बाद, दर्द हुआ बिछड़ने के बरसों बाद। भूल चुके थे हम तुम्हें अरसों तक, फिर आज क्यों मिले एहसासों तक। वक़्त की धूल में दब गए थे जज़्बात, खामोश हो गई थीं दिल की सारी बात। सोचा था भूल गए हैं तुम्हें हम, फिर क्यों याद आए तुम इतने बरसों बाद। जिस रिश्ते को वक़्त ने पीछे छोड़ दिया, दिल ने आज फिर उसे क्यों जोड़ दिया? ना कोई शिकवा, ना कोई सवाल, फिर क्यों तुम्हारी याद ने किया बेहाल। शायद कुछ रिश्ते मिटते नहीं कभी, बस खामोश हो जाते हैं ज़िंदगी में कहीं। तुम दूर थे, फिर भी दिल के पास रहे, हम भूलते रहे… और तुम याद आते रहे।
ममत्व नौ महीने गर्भ में रखा नवजात को, स्नेह से सँवारा उसके जीवन को। हर पल उसकी चिंता सताती, क्षणभर भी उससे दूर न जाती। कलेजे से सदा लगाए रखती, ममता की छाँव में उसे रखती। शुभ मुहूर्त में नवजात का जन्म हुआ, माँ के हृदय में जैसे चाँद खिला। रूढ़िवादिता का त्याग किया, बालिका को उसका अधिकार दिया। खूब पढ़ाया, खूब दुलार लुटाया, हर सुख से उसका जीवन सजाया। माँ की आँखों की वही चाँदनी, बेटी के जीवन में उजियारा बनी। माँ का स्नेह अमूल्य धन है, ममता को मेरा शत-शत नमन है। माँ केवल जन्म नहीं देती, वह जीवन को दिशा भी देती है। बेटी को अधिकार और सम्मान देकर, उसके सपनों को उड़ान भी देती है। ममता का यही सच्चा रूप है, जिसमें प्रेम भी है, अधिकार भी। माँ के स्नेह की छाँव तले, बेटी का जीवन बने साकार भी।
"भोले, तेरे बिना हम अधूरे, फिर भी तेरे प्रेम से हम पूरे।"
समय का किरदार नर ने नारी को, पशुओं ने जंतुओं को— न जाने इस संसार ने कितने रूपों में बाँटा है। यह संसार प्रारंभ से अंत तक, एक अनजानी यात्रा है। प्रारंभ से मध्य और मध्य से अंत तक, हर जीवन अपनी कहानी लिखता है। हर किसी को लगता है, कि वह अंधकार में घिरा हुआ है। पर वही अंधकार कभी-कभी, एक नई रोशनी का आधार बन जाता है। अंधकार का यह दौर, मन को मौन कर देता है। समय की तेज धार में, हर किरदार बदलता रहता है। मध्य से अंत तक का सफर, अभी भी अनजाना है। क्योंकि जीवन के इस रंगमंच पर, हर व्यक्ति एक नया किरदार निभाता है।
“मन में शिव, शिव में मन, हर जगह शिव—तुम ही शिव, तुम ही शिव। आत्मा में तुम, हृदय में तुम, हर साँस में तुम।” 🕉️🙏
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