मेरी प्रेरणा
कौन है मेरी प्रेरणा?
जब भी मन यह प्रश्न उठाता है,
उत्तर एक नहीं,
पूरा मेरा परिवार बनकर सामने आ जाता है।
मेरी माँ मेरी पहली गुरु हैं,
मेरे पिताजी मेरे जीवन का संबल हैं।
मेरे भाऊजी का स्नेह,
मेरे जीवन की अमूल्य निधि है।
मेरे नाना-नानी, दादा-दादी,
ताऊ-ताई, चाचा-चाची,
मामा-मामी और मेरे भाई-बहन—
ये सभी मेरे जीवन की अमूल्य प्रेरणाएँ हैं।
इन्होंने मुझे चलना सिखाया,
गिरकर फिर संभलना सिखाया।
हँसना, मुस्कुराना,
मिल-जुलकर प्रेम से रहना सिखाया।
इनके संस्कारों ने मेरे व्यक्तित्व को गढ़ा,
इनके आशीर्वाद ने मेरे जीवन को सँवारा।
इनके स्नेह की छाया में
मैंने हर कठिन राह को सहज पाया।
मेरे नाना-नानी का स्नेह
मेरे जीवन की अनमोल धरोहर है।
उन्होंने मुझे केवल जीना ही नहीं,
बल्कि सच्चे संस्कारों के साथ जीवन जीना सिखाया।
मेरा परिवार निर्मल, स्वच्छ,
बहते हुए जल के समान पावन है।
जो हर पल अपने प्रेम, त्याग और आशीर्वाद से
मेरे जीवन को सींचता रहता है।
मैं ईश्वर का हृदय से धन्यवाद करती हूँ
कि मुझे ऐसा परिवार मिला।
यही मेरा साहस है,
यही मेरी शक्ति है,
और यही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।